शिबू सोरेन: झारखंड के 'दिशोम गुरु' की जीवन यात्रा


शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी, 1944 को नेमरा गांव, रामगढ़ जिले में हुआ था। उनके पिता की मृत्यु महाजनों के हाथों हुई थी जब शिबू सोरेन सिर्फ 15 वर्ष के थे। इस घटना ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। शिबू सोरेन ने अपनी शिक्षा प्राप्त की और फिर वे झारखंड के मुद्दों पर केंद्रित हो गए।

शिबू सोरेन, झारखंड के प्रसिद्ध नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक का निधन 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें 'दिशोम गुरु' के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ है 'ज़मीन के गुरु'। शिबू सोरेन ने अपने जीवन में झारखंड के अलग राज्य बनाने के लिए संघर्ष किया और आदिवासी समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी ।


राजनीतिक जीवन

शिबू सोरेन ने 1973 में झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना ए के रॉय और बिनोद बिहारी महतो के साथ की। उन्हें झारखंड के अलग राज्य की मांग के लिए संघर्ष करने के लिए जाना जाता है। शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे [2][3].




*झारखंड आंदोलन में भूमिका*: शिबू सोरेन ने झारखंड के अलग राज्य बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने इस आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए काम किया और आदिवासी समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी।

*JMM की लीडरशिप*: शिबू सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा को एक मजबूत पार्टी बनाया और झारखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया।


मुख्य योगदान

*झारखंड आंदोलन*: शिबू सोरेन ने झारखंड के अलग राज्य बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 15 नवंबर, 2000 को झारखंड भारत का 28वां राज्य बना।


*आदिवासी अधिकार*: उन्हें आदिवासी समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए 'दिशोम गुरु' कहा जाता था। उन्होंने आदिवासी समुदाय के हितों के लिए काम किया।

*राजनीतिक सफर*: शिबू सोरेन का राजनीतिक सफर बहुत संघर्षों भरा था। उन्होंने कई बार चुनाव लड़े और तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे।


निधन

शिबू सोरेन का निधन 81 वर्ष की आयु में दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में हुआ। उनके निधन पर झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दुख प्रकट किया । और बच्चों की तरह रोने लगे। शिबू सोरेन झारखंड के लिए एक वरदान थे उसके जाने पर पूरे झारखंडवासी दुख में है। शिबू सोरेन की कमी को कोई 

पूरा नहीं कर सकता है।

शिबू सोरेन की विरासत झारखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण है और उनके परिवार के सदस्य, विशेष रूप से हेमंत सोरेन, झारखंड की राजनीति में सक्रिय हैं।


हेमंत सोरेन ने पिता शिबू सोरेन को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी. उन्होंने इस पोस्ट में कहा कि मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुजर रहा हूं. मेरे सिर से सिर्फ पिता का साया नहीं गया, झारखंड की आत्मा का स्तंभ चला गया. मैं उन्हें सिर्फ बाबा नहीं कहता था. वे मेरे पथप्रदर्शक थे, मेरे विचारों की जड़ें थे और उस जंगल जैसी छाया थे, जिसने हजारों-लाखों झारखंडियों को धूप और अन्याय से बचाया.